प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) क्या है? फायदे और सब्सिडी की पूरी जानकारी
Gaon Deal टीम · अपडेट: 2026-09-11
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 1 जुलाई 2015 को शुरू की गई केंद्र सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसका मकसद है हर खेत तक सिंचाई का भरोसेमंद साधन पहुंचाना — यानी “हर खेत को पानी”। इसके पीछे सोच यह है कि पानी की हर बूंद से ज्यादा से ज्यादा पैदावार ली जाए और इससे गांवों में आर्थिक मजबूती आए। योजना जल स्रोत, पानी पहुंचाने की व्यवस्था (डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क) और खेत तक पानी के बेहतर इस्तेमाल — तीनों स्तर पर मिलकर काम करती है, और इसके लिए जिला व राज्य स्तर पर नई तकनीक व जानकारी का प्रसार भी किया जाता है।
योजना का मकसद
- हर खेत को सिंचाई का भरोसेमंद स्रोत उपलब्ध कराना।
- पानी के इस्तेमाल की क्षमता बढ़ाना — “प्रति बूंद ज्यादा फसल” (Per Drop More Crop)।
- जल स्रोत, वितरण नेटवर्क और खेत-स्तर की तकनीक को आपस में जोड़ना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के जरिए आर्थिक समृद्धि लाना।
योजना के मुख्य घटक
- सूक्ष्म सिंचाई: ड्रिप (टपका) और स्प्रिंकलर (छिड़काव) सिंचाई प्रणाली — पोर्टेबल, मिनी, बड़ी रेन गन जैसे कई प्रकार शामिल हैं।
- जल स्रोत विकास और भंडारण: व्यक्तिगत और सामुदायिक खेत तालाब, चेक डैम, कुंड, तालाबों/टैंकों की लाइनिंग और मरम्मत।
- ट्यूबवेल/बोरवेल और जल उठाने के उपकरण: उथले और मध्यम गहराई के ट्यूबवेल, बिजली/डीजल/सौर/वायु ऊर्जा से चलने वाले पंप।
- जल वितरण प्रणाली: पाइप और प्रीकास्ट नेटवर्क से खेत तक पानी पहुंचाना, जिससे बर्बादी कम हो।
सब्सिडी कितनी मिलती है
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई (सूक्ष्म सिंचाई) पर सबसे स्थिर और जानी-मानी सुविधा यह है: छोटे और सीमांत किसानों को लागत का 55% तक और बाकी किसानों को 45% तक अनुदान मिलता है, जो अधिकतम 5 हेक्टेयर तक के रकबे पर लागू होता है। कई राज्य सरकारें इसके ऊपर अपनी तरफ से अतिरिक्त सब्सिडी भी जोड़ती हैं, जिससे किसान को मिलने वाला कुल फायदा और बढ़ जाता है।
इसके अलावा खेत तालाब, तालाब/टैंक की लाइनिंग, ट्यूबवेल, पाइप वितरण प्रणाली और जल उठाने के उपकरणों पर भी अलग-अलग घटकों के तहत आमतौर पर लागत का 50% (कुछ खास मामलों में इससे ज्यादा, जैसे बीजीआरईआई के तहत कुछ कामों पर 100% तक) अनुदान मिलता है, जिसकी अधिकतम राशि (सीलिंग) राज्य, इलाके (मैदानी/पहाड़ी) और योजना के उप-घटक (एनएमएसए, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, बीजीआरईआई, एमआईडीएच आदि) के हिसाब से अलग-अलग तय होती है।
ध्यान रखें: ऊपर दी गई सब्सिडी सीमाएं योजना के 2015-16 से 2019-20 के चरण की हैं और तब से समय-समय पर बदली और बढ़ाई गई हैं। सटीक और मौजूदा राशि हर राज्य में अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन करने से पहले अपने जिला कृषि कार्यालय से मौजूदा दरें और अधिकतम सीमा जरूर कंफर्म कर लें।
पात्रता
- अपनी जमीन पर खेती करने वाले सभी किसान — छोटे और सीमांत किसानों को ज्यादा सब्सिडी मिलती है।
- कुछ घटकों में किसान समूह, सहकारी समितियां और स्वयं सहायता समूह (SHG) भी पात्र हो सकते हैं।
- सामुदायिक जल संचयन ढांचों के लिए ग्राम पंचायत या किसानों का समूह भी आवेदन कर सकता है।
आवेदन कैसे करें और किससे संपर्क करें
PMKSY के अलग-अलग घटकों के लिए आवेदन अलग-अलग जिला अधिकारियों के जरिए होता है — अपने घटक के हिसाब से इनमें से सही कार्यालय में संपर्क करें:
- जिला कृषि अधिकारी
- जिला मृदा संरक्षण अधिकारी
- परियोजना निदेशक (आत्मा)
- जिला फलोत्पादन अधिकारी
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