चने की खेती: बुवाई, सिंचाई, इल्ली नियंत्रण और ज्यादा पैदावार

Gaon Deal टीम · अपडेट: 2026-08-20

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चना रबी की मुख्य दलहनी फसल है — कम पानी में अच्छा मुनाफा, और खेत की उर्वरता भी बढ़ाता है (जड़ें हवा से नाइट्रोजन जमा करती हैं)। प्रति एकड़ 6-10 क्विंटल पैदावार सामान्य है।

बुवाई

  • समय: 10 अक्टूबर - 10 नवंबर (सिंचित); बारानी में अक्टूबर के पहले पखवाड़े।
  • बीज दर: देसी चना 25-30 किलो, काबुली 35-40 किलो प्रति एकड़।
  • बीज उपचार: फफूंदनाशक + राइजोबियम कल्चर से उपचार — जड़ गलन से बचाव और ज्यादा पैदावार।
  • किस्में: GNG 1581, GNG 2144, पूसा 372, JG 11; काबुली में पूसा 1003।

सिंचाई और खुटाई

  • सिंचाई 1-2 बार ही — फूल आते समय बिल्कुल नहीं (फूल झड़ते हैं)।
  • 30-40 दिन पर खुटाई (ऊपरी कोंपल तोड़ना) — शाखाएं बढ़ती हैं, पैदावार 15-20% ज्यादा।

इल्ली (फली छेदक) नियंत्रण

  • चने का सबसे बड़ा दुश्मन फली छेदक इल्ली है — फली बनते ही निगरानी शुरू करें।
  • खेत में 8-10 जगह T आकार की खूंटियां लगाएं — चिड़ियां बैठकर इल्लियां खाती हैं (मुफ्त का नियंत्रण)।
  • ज्यादा प्रकोप पर ही दवा छिड़कें, शाम के समय।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चने में कितनी सिंचाई करनी चाहिए?

चना कम पानी की फसल है — 1-2 सिंचाई ही काफी हैं (फूल से पहले और फली बनते समय)। फूल आते समय सिंचाई कभी न करें, फूल झड़ जाते हैं। ज्यादा पानी से फसल गिरती है।

चने की खुटाई (nipping) क्या है?

बुवाई के 30-40 दिन बाद पौधे की ऊपरी कोंपल तोड़ने को खुटाई कहते हैं। इससे पौधे में ज्यादा शाखाएं निकलती हैं और पैदावार 15-20% बढ़ती है। तोड़ी कोंपलें साग के रूप में बिकती भी हैं।

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