सरसों की खेती: बुवाई का समय, किस्में, सिंचाई और पैदावार

Gaon Deal टीम · अपडेट: 2026-08-20

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सरसों राजस्थान-हरियाणा की सबसे बड़ी नकदी फसल है — कम पानी, कम लागत और अच्छा भाव। सही तरीके से करने पर प्रति एकड़ 8-12 क्विंटल पैदावार मिलती है।

बुवाई

  • समय: 25 सितंबर - 20 अक्टूबर।
  • बीज दर: 1.5-2 किलो प्रति एकड़; कतार से कतार 45 सेमी।
  • किस्में: पूसा बोल्ड, RH-30, RH-725, गिरिराज, पूसा सरसों-28 — अपने क्षेत्र के हिसाब से चुनें।
  • बुवाई से पहले खेत में नमी जरूरी — पलेवा करके बोएं।

खाद और सिंचाई

  • DAP 35-40 किलो + गंधक (सल्फर) 10 किलो प्रति एकड़ — सरसों में तेल और चमक गंधक से ही आती है।
  • यूरिया 35-40 किलो — पहली सिंचाई पर।
  • सिंचाई सिर्फ 2: फूल आने पर (30-35 दिन) और फली बनने पर (60-65 दिन)।

रोग-कीट और पाला

  • सफेद रतुआ: पत्तों पर सफेद फफोले — दिखते ही फफूंदनाशक छिड़कें।
  • चेपा (माहू): जनवरी-फरवरी में हरे-काले छोटे कीट — शुरुआत में ही नियंत्रण करें।
  • पाला: दिसंबर-जनवरी की साफ ठंडी रातों में खतरा — पाले की आशंका पर हल्की सिंचाई करें या गंधक का छिड़काव (0.1%)।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सरसों की बुवाई कब करनी चाहिए?

सरसों की बुवाई का सबसे अच्छा समय 25 सितंबर से 20 अक्टूबर है। जल्दी बुवाई से पैंटेड बग और देर से बुवाई से पाले का खतरा बढ़ता है।

सरसों में कितनी सिंचाई चाहिए?

सरसों कम पानी की फसल है — सिर्फ 2 सिंचाई काफी हैं: पहली फूल आते समय (30-35 दिन) और दूसरी फली बनते समय (60-65 दिन)।

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